I was wrong when i was say that Your are my "LIFE LINE" because today you are not with me but i am still ALIVE.
Thursday, November 10, 2011
Monday, November 7, 2011
अभिनव की शादी 06.11.11
कल ऑफीस के साथी अभिनव की शादी थी, वहाँ पर मैने सब कुछ भूल कर काफ़ी मस्ती की और D.J. पर डांस भी खूब किया, आफ़िस का पूरा स्टाफ था और उस दिन देवठान एकादशी थी, इसी दिन अपनी भी शादी हुई थी सो मुझे वो सब अच्छे लम्हे याद आ रहे थे, फिर D.J. पर अभिनव और उसकी वाइफ निशा को लाया गया और थोड़ी बहुत ना नुकर के बाद उन दोनो ने भी डांस किया, मैने अभिनव से वो स्टेप भी करवाया जिसमे अपने घुटनो पर बैठकर मैने तुमसे इज़हार किया था , सच मैं ऐसा लग रहा था की हम दोनो डांस कर रहे हो बहुत ही रोमॅंटिक पल था वो, मैने भी लोगो की परवाह ना करते हुए काफ़ी एंजाय किया. पर जब घर आया तो शायद उतना ही उदास भी हुया
सच तुम बहुत याद आती हो मुझे.............
Saturday, November 5, 2011
"मेरे जीवन साथी"
"मेरे जीवन साथी"
हों तुम क्या मेरे लिए
कैसे बताऊँ,
मै तुमसे अब कैसे छुपाऊ
कुछ मैं आधा अधुरा हूँ
कुछ तुम पूरी - पूरी है,
फिर मै कैसे कहू की
ये तुम हो !
ये मै हूँ !
जब की हम एक है
गिर रही है बिजली
सागर में दूर कही,
उठ रही है तरंगे
मेरे मन में यहीं कही,
छा रहा है आँखों में नशा
तेरे खुमार का,
फिर मै कैसे कह दूँ
ये तुम हो !
ये मै हूँ !
जब की हम एक है
तुम बदले तो क्या बदले
पर्वतों के भी रंग
बदल गए,
पंछी ठहरे रात को
और दिन में मचल गए,
फिर मै कैसे कह दूँ की
ये तुम हो
ये मै हूँ
जब की हम एक है
गंगा -जल
मैला नहीं है आज भी,
न जाने कितनो ने,
इसमें डुबकी लगायी
वो तो तारनहार है,
तारेगी,
मेरे इस जीवन को ,
तुम तो सदियों से मेरी हों
जन्मो - जन्मो को तारोगी
फिर मै कैसे कह दूँ
की ये तुम हो
यें में हूँ
जब की हम एक है
"मेरे जीवन साथी"
Tuesday, October 25, 2011
HAPPY DIWALI MY HONEY एक तू ही नही
HAPPY DIWALI MY HONEY
आज बस यही कह सकता हूँ कि
सौ दर्द हैं,सौ राहते , सब मिला दिलनशीं
एक तू ही नही
रूखी रूखी सी यह हवा, और सूखे पत्ते की तरह
शहर की,सड़को पे मैं, लावारिस, उड़ता हुआ
सौ रास्ते पर तेरी राह नही.
सौ दर्द हैं,सौ राहते सब मिला दिलनशीं
एक तू ही नही
बहता हैं पानी, बहने दे, वक़्त को यूही, रहने दे
दरिया ने करवट ली है तो, साहिलों को सहने दे
सौ हसरतें पर तेरा गम नही.
सौ दर्द हैं,सौ राहते सब मिला दिलनशीं
एक तू ही नही
I LOVE YOU JAAN

आज बस यही कह सकता हूँ कि
सौ दर्द हैं,सौ राहते , सब मिला दिलनशीं
एक तू ही नही
रूखी रूखी सी यह हवा, और सूखे पत्ते की तरह
शहर की,सड़को पे मैं, लावारिस, उड़ता हुआ
सौ रास्ते पर तेरी राह नही.
सौ दर्द हैं,सौ राहते सब मिला दिलनशीं
एक तू ही नही
बहता हैं पानी, बहने दे, वक़्त को यूही, रहने दे
दरिया ने करवट ली है तो, साहिलों को सहने दे
सौ हसरतें पर तेरा गम नही.
सौ दर्द हैं,सौ राहते सब मिला दिलनशीं
एक तू ही नही
I LOVE YOU JAAN
Saturday, October 15, 2011
Today is Again "करवा चौथ"
आज करवा चौथ है श्वेतात्योहार, Events तो आते जाते रहेंगे, और शायद इस दिल के जख्म भी समय के साथ -साथ भर जाएँगे पर जब -जब तुम्हारी यादों का झोंका आएगा तब तब एक टीस सी दिल मैं उठेगी और ये आवाज़ निकलेगी कि आज भी मैं तुम्हे उतना ही प्यार करता हूँ श्वेता
जैसे की कल हुआ कल सुबह मैं रेलवे स्टेशन (आगरा फ़ोर्ट) गया था तुम्हारे मम्मी पापा को छोड़ने इलाहाबाद के लिए, विशाल ओर अंश भी साथ थे वहाँ पर वही सब दुबारा याद आ गया जब मैं और विशाल तुम्हे अपनी Engagement के एक दिन बाद छोड़ने आए थे, कुछ नही बदला था वहाँ वही गाड़ी, वही समय, वही Announcement,
वो पल मेरे जीवन के Most Romantic पलों मैं से एक था, और जब गाड़ी जा रही थी तब हम एक दूसरे को हाथ हिलाकर विदा कर रहे थे कि फिर मिलेंगे
मैं आज भी गाड़ी को जाते हुए देख रहा था पर आज तुम नही थी ,
"HAPPY KARWA CHAUTH " Sweet Heart
यादों को सहेज कर रखना मेरी आदत है क्योंकि ये कभी छोड़कर नही जाती , तुम्हारे कुछ Beautiful फोटो
![]() |
| Our First & Last Karva Chowth |
![]() |
| Our First & Last Karva Chowth |
![]() |
| My Dream Queen |
![]() |
| Golden Movment |
![]() |
| My Shweta |
![]() |
| Your First Gift on Karva Chauth |
Sunday, October 2, 2011
Dear Shweta,
"तुम्हे जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ "

तुम्हे याद है हमारी Engagement के बाद और शादी से पहले तुम्हारा जन्मदिन आया था तब मैंने तुम्हे 25 Red Roses & Chocolates भेजे थे वो दिन भी क्या दिन थे आज भी जब मैं उदास होता हूँ या नींद नही आती तब मैं उन्ही मीठी यादों को सोचता हूँ और ना जाने मैं कब सो जाता हूँ
मैने हर Festival हर Event तुम्हारी साथ सिर्फ़ एक बार ही मनाया है अब चाही वो दीवाली हो या होली, करवाचौथ, हमारी शादी के सालगरह या तुम्हारा जन्मदिन तुम्हे पता है मेरा जन्मदिन 27th Feb को आता है, पर 27th Date. से मुझे नफ़रत सी हो गयी है क्योंकि इसी दिन तुम मुझे हमेशा के लिए छोड़ गयी थी इसलिए मैं अब अपना जन्मदिन कभी भी मनाना नही चाहता श्वेता
शायद लोग मुझे पागल कहते होंगे कि मैं तुम्हारे जाने के बाद भी तुमसे बातें किया करता हूँ लोग कहते है मुझसे कि अब तुम्हे भूल जाऊं, तुम्हारे फोटो कमरे से हटा दूँ और एक नयी जिंदगी की शुरूआत करूँ, मैं जान्ता हूँ कि वो लोग भी अपनी जगह सही है पर ये मेरे लिए बहुत मुश्किल है,
I Will Love You Forever & Miss You on Every Step.
Wednesday, September 28, 2011
प्रथम पुण्य तिथी 28.09.2011
क्या कहूँ शब्द ही जैसे ख़त्म हो गये हैं श्वेता आज तुम्हारी पहली पुण्या तिथी है कभी ना सोचा था की ये दिन भी देखने पदेगे तुम्हारे जाने के बाद बहुत कुछ बदल गया मेरी जिंदगी
मैं और ऐसा बदलाव जो ना चाहते हुए भी मुझे स्वीकार करना पड़ा अगर नही बदला तो वो सदर बाजार की वो शॉप जहाँ हम अक्सर Tomato Soup पिया करते थे, वो फूल वाले की दुकान जिसे तुम मेरा फूल वाला कहा करती थी, वो रास्ता , वो मंदिर, और भी बहुत कुछ......
दिल बहुत ज़ोर ज़ोर से रोना चाहता है पर मैं रो भी नही सकता सबके सामने कभी कभी लगता है भाग जाऊं बहुत दूर जहाँ सिर्फ़ मैं हूँ और तुम्हारी यादें .. I Love You
Friday, September 23, 2011
Friday, September 16, 2011
आज कनागत की चतुर्थी तिथी है
आज घर मैं सबकी आँख जल्दी ही खुल गयी थी श्वेता, पर कोई किसी से कुछ कह नही रहा था, आज के दिन की वो मनहूस सुबह सबको याद थी , आज कनागत की चतुर्थी तिथी है
आँख खुलते ही वही सब कुछ आँखों के सामने आने लगा जब हम हॉस्पीटल मैं थे डॉक्टर साहब सुबह राउंड पर आए थे तो तुमने उनसे कहा की मुझे . मैं बहुत . हो रहा है पर वो बोले चिंता मत करो सब ठीक हो जाएगा और उन्होने तुम्हे एक गोली दे दी, मैने तुम्हे सुबह ०६:४५ पर दूध पिलाया था, और तुमने सुबह ७:०० बजे इलाहाबाद भाभी से फ़ोन पर पूछा था कि मम्मी पापा किस डिब्बे मैं बैठे है बेचारी भाभी को क्या पता था कि वो तुमसे आख़िरी बार बात कर रही है , फिर हम दोनो बात करते रहे और तुमने मुझसे कहा की मैं आगरा कैंट जाकर मम्मी पापा को ले आऊ, मैने कहा भी की आयुष को बोल देता हूँ वो जाकर ले आएगा पर तुमने मुझे ही भेज दिया, ऐक दिन पहले तक तो तुम मुझे अपने से दूर नही जाने दे रही थी कह रही थी क़ि तुम बस मेरे पास ही बैठे रहो, शायद तुम्हे भी कुछ एहसास हो गया होगा इसीलिए तुमने खुद ही मुझे अपने से बहुत दूर कर दिया, जब मैं गया तब तुमने कहा मेरी चिंता मत करो, मैंने तुम्हारे माथे पर चूमा और चला गया
मैं स्टेशन चला गया ०७:४५ पर लेकिन मेरा दिल अजीब सा हो रहा था, स्टेशन पहूंचा तो गाड़ी लेट थी, मुझे बहुत बैचेनी हो रही थी तुम्हारे पास आने की एक पल को लगा की मैं उन्हे बगेर लिए ही लौट आऊ तभी अचानक विशाल का फोन आया ०८:१५ पर की जल्दी आजा भाभी की तबीयत अचानक बहुत बिगड़ रही है, मैं उन्हे बगेर लिए ही वहाँ से बापस भागा मुझे बहुत ज़ोर ज़ोर से रोना आ रहा था मेरा दिल बैठा जा रहा था लगा की कुछ बहुत ग़लत हो गया है, आकर मैं सीधा तुम्हारे कमरे मैं आया तो देखा तुम बेहोश थी, विशाल रो रहा था, जब डॉक्टर से मैने पूछा की क्या हुआ है तो उसने कहा की she is dead मैं चक्कर खाकर उसके कॅबिन मैं ही गिर पड़ा, मैं उठा ओर आकर तुम्हे बहुत उठाया बहुत हिलाया, पानी डाला, अपनी नाक भी सिकोडी जिसे देखकर तुम अक्सर हंस जाया करती थी पर तुम नही हँसी तुम बहुत मुझसे नाराज़ होकर बहुत दूर चली थी,
अभी हमारा अंश ४ दिन का भी नही हुआ था, समझ नही आ रहा था की उसका क्या होगा ?
कुछ ही पलों मैं मेरी दुनिया ही उजड़ गयी, कई बार मैंने कोशिश भी की तुम्हारे पास आने की पर हमारे अंश की मासूम सूरत मेरे सामने आ जाती है,
आज बहुत कुछ बदल गया है श्वेता पर मैं तुम्हे मेरी आत्मा से प्यार करता रहूँगा . . .
जगजीत सिंह की ये ग़ज़ल मेरे ऊपर बिल्कुल सही बैठती है
चिट्ठी ना कोई संदेश…
जाने वो कौन सा देश जहाँ तुम चले गये हो
इस दिल पे लगा के ठेस जाने वो कौन सा देश
जहाँ तुम चले गये हो
एक आह भरी होगी हमने ना सुनी होगी
जाते जाते तुमने आवाज़ तो दी होगी
हर वक़्त यही है गम, उस वक़्त कहा थे हम
कहाँ तुम चले गये हो
चिट्ठी ना कोई संदेश… जाने
वो कौन सा देश जहाँ तुम चले गये हो
हर चीज़ पे अश्कों से लिखा है तुम्हारा नाम
ये रास्ते घर गलियाँ तुम्हे कर ना सके सलाम
हाय दिल में रह गयी बात, जल्दी से छुड़ा कर हाथ
कहाँ तुम चली गयी हो
चिट्ठी ना कोई संदेश…
जाने वो कौन सा देश जहाँ तुम चली गयी हो
अब यादों के काँटे इस दिल में चुभते हैं
ना दर्द ठहरता है ना आँसू रुकते हैं
तुम्हे धूंड रहा है प्यार, हम कैसे करें इक़रार
कहा तुम चले गयेहो
आँख खुलते ही वही सब कुछ आँखों के सामने आने लगा जब हम हॉस्पीटल मैं थे डॉक्टर साहब सुबह राउंड पर आए थे तो तुमने उनसे कहा की मुझे . मैं बहुत . हो रहा है पर वो बोले चिंता मत करो सब ठीक हो जाएगा और उन्होने तुम्हे एक गोली दे दी, मैने तुम्हे सुबह ०६:४५ पर दूध पिलाया था, और तुमने सुबह ७:०० बजे इलाहाबाद भाभी से फ़ोन पर पूछा था कि मम्मी पापा किस डिब्बे मैं बैठे है बेचारी भाभी को क्या पता था कि वो तुमसे आख़िरी बार बात कर रही है , फिर हम दोनो बात करते रहे और तुमने मुझसे कहा की मैं आगरा कैंट जाकर मम्मी पापा को ले आऊ, मैने कहा भी की आयुष को बोल देता हूँ वो जाकर ले आएगा पर तुमने मुझे ही भेज दिया, ऐक दिन पहले तक तो तुम मुझे अपने से दूर नही जाने दे रही थी कह रही थी क़ि तुम बस मेरे पास ही बैठे रहो, शायद तुम्हे भी कुछ एहसास हो गया होगा इसीलिए तुमने खुद ही मुझे अपने से बहुत दूर कर दिया, जब मैं गया तब तुमने कहा मेरी चिंता मत करो, मैंने तुम्हारे माथे पर चूमा और चला गया
मैं स्टेशन चला गया ०७:४५ पर लेकिन मेरा दिल अजीब सा हो रहा था, स्टेशन पहूंचा तो गाड़ी लेट थी, मुझे बहुत बैचेनी हो रही थी तुम्हारे पास आने की एक पल को लगा की मैं उन्हे बगेर लिए ही लौट आऊ तभी अचानक विशाल का फोन आया ०८:१५ पर की जल्दी आजा भाभी की तबीयत अचानक बहुत बिगड़ रही है, मैं उन्हे बगेर लिए ही वहाँ से बापस भागा मुझे बहुत ज़ोर ज़ोर से रोना आ रहा था मेरा दिल बैठा जा रहा था लगा की कुछ बहुत ग़लत हो गया है, आकर मैं सीधा तुम्हारे कमरे मैं आया तो देखा तुम बेहोश थी, विशाल रो रहा था, जब डॉक्टर से मैने पूछा की क्या हुआ है तो उसने कहा की she is dead मैं चक्कर खाकर उसके कॅबिन मैं ही गिर पड़ा, मैं उठा ओर आकर तुम्हे बहुत उठाया बहुत हिलाया, पानी डाला, अपनी नाक भी सिकोडी जिसे देखकर तुम अक्सर हंस जाया करती थी पर तुम नही हँसी तुम बहुत मुझसे नाराज़ होकर बहुत दूर चली थी,
अभी हमारा अंश ४ दिन का भी नही हुआ था, समझ नही आ रहा था की उसका क्या होगा ?
कुछ ही पलों मैं मेरी दुनिया ही उजड़ गयी, कई बार मैंने कोशिश भी की तुम्हारे पास आने की पर हमारे अंश की मासूम सूरत मेरे सामने आ जाती है,
आज बहुत कुछ बदल गया है श्वेता पर मैं तुम्हे मेरी आत्मा से प्यार करता रहूँगा . . .
जगजीत सिंह की ये ग़ज़ल मेरे ऊपर बिल्कुल सही बैठती है
चिट्ठी ना कोई संदेश…
जाने वो कौन सा देश जहाँ तुम चले गये हो
इस दिल पे लगा के ठेस जाने वो कौन सा देश
जहाँ तुम चले गये हो
एक आह भरी होगी हमने ना सुनी होगी
जाते जाते तुमने आवाज़ तो दी होगी
हर वक़्त यही है गम, उस वक़्त कहा थे हम
कहाँ तुम चले गये हो
चिट्ठी ना कोई संदेश… जाने
वो कौन सा देश जहाँ तुम चले गये हो
हर चीज़ पे अश्कों से लिखा है तुम्हारा नाम
ये रास्ते घर गलियाँ तुम्हे कर ना सके सलाम
हाय दिल में रह गयी बात, जल्दी से छुड़ा कर हाथ
कहाँ तुम चली गयी हो
चिट्ठी ना कोई संदेश…
जाने वो कौन सा देश जहाँ तुम चली गयी हो
अब यादों के काँटे इस दिल में चुभते हैं
ना दर्द ठहरता है ना आँसू रुकते हैं
तुम्हे धूंड रहा है प्यार, हम कैसे करें इक़रार
कहा तुम चले गयेहो
Monday, September 12, 2011
श्वेता तुम्हे याद है पिछली बार गणेश बिसर्जन मैं तुमने काफ़ी पूजा अर्चना की थी और अगले ही दिन कनागत (पित्र पक्षा) लग रहे थे, ऐसा ही कुछ आज भी है आज से कनागत (पित्र पक्षा)लग रहे हैं, कल गणेश बिसर्जन हुआ था हालाँकि पिछले बार Dt.23th Sep.थी और आज 12th Sep. है,
मैं आफ़िस जाने के तैयारी कर रहा था की अचानक सुबह ८:१५ पर तुम्हे दर्द हुआ और तभी हम सब लोग तुम्हे हॉस्पीटल ले गये थे और डॉक्टर ने दोपहर ३:०० बजे का टाइम दिया था
तुमने मुझसे कहा कि आज से कनगत लग रहे है देखना तुम्हारे बाबा आएँगे और ऐसा ही हुआ शाम ०४:४० पर हमारा अंश इस दुनिया मैं आया, हम बहुत खुश थे लगा की जैसे सारी मेहनत सफल हुई एक अजीब सी खुशी महसूस कर रहा था, लगा बस life settle ho gayee. तुम्हारी तबीयत थोड़ी खराब हो रही थी ओर तुम्हे बुखार आ गया था पर डॉक्टर बोला कि घबराने की कोई बात नही है
आज हमारा अंश एक साल का हो चुका है श्वेता, सब कहते है मुझसे कि पहला जन्मदिन मनाना है पर पता नही क्यों मैं नही मनाना चाहता, तुम्हारे बिना मुझे हर खुशी अधूरी लग रही है श्वेता, ये आँसू
आज भी थमने का नाम नही लेते, खुल कर मैं रो भी नही सकता ये ब्लॉग लिखते समय मेरे हाथ काप रहे है बही मंज़र मेरी आँखों के सामने आ रहा है
मुझे बिश्वास है कि तुम अंश के आस पास ही रहती हो क्योंकी वो कभी कभी तस्वीर या दीबार को देख कर बहुत हंसता है उसे ढेर सारा आशीर्वाद देना और उसे अपने जैसा बनाना मेरे जैसा नही क्योंकि I am failure man.
मैं आफ़िस जाने के तैयारी कर रहा था की अचानक सुबह ८:१५ पर तुम्हे दर्द हुआ और तभी हम सब लोग तुम्हे हॉस्पीटल ले गये थे और डॉक्टर ने दोपहर ३:०० बजे का टाइम दिया था
तुमने मुझसे कहा कि आज से कनगत लग रहे है देखना तुम्हारे बाबा आएँगे और ऐसा ही हुआ शाम ०४:४० पर हमारा अंश इस दुनिया मैं आया, हम बहुत खुश थे लगा की जैसे सारी मेहनत सफल हुई एक अजीब सी खुशी महसूस कर रहा था, लगा बस life settle ho gayee. तुम्हारी तबीयत थोड़ी खराब हो रही थी ओर तुम्हे बुखार आ गया था पर डॉक्टर बोला कि घबराने की कोई बात नही है
| with Mom n Dad |
आज हमारा अंश एक साल का हो चुका है श्वेता, सब कहते है मुझसे कि पहला जन्मदिन मनाना है पर पता नही क्यों मैं नही मनाना चाहता, तुम्हारे बिना मुझे हर खुशी अधूरी लग रही है श्वेता, ये आँसू
मुझे बिश्वास है कि तुम अंश के आस पास ही रहती हो क्योंकी वो कभी कभी तस्वीर या दीबार को देख कर बहुत हंसता है उसे ढेर सारा आशीर्वाद देना और उसे अपने जैसा बनाना मेरे जैसा नही क्योंकि I am failure man.
Friday, September 2, 2011
दो नैना और इक कहानी
दो नैना और इक कहानी
याद है तुम्हें जब तुमने एक बार कहा था कि कहीं ऐसा न हो कि एक दिन हमें एक दूसरे को देखने के लिए आँखें तरस जाएँगी...पता नहीं क्या सोचकर तुमने ये कहा था...शायद तुम्हें एहसास हो चला था कि ये जिंदगी हमारी झोली में क्या डालने वाली है...शायद ये एक एहसास ही तो था जो हमे जोड़े रहा...जब तुम कुछ पूँछा करती थीं...तो मैं खामोशी से मुस्कुरा दिया करता था...और आज देखो मेरे पास कहने को इतना कुछ है...पर वो मुस्कुराती हुई आँखें नहीं जो मेरी तरफ देखा करती थीं...कुछ भी बड़े प्यार से सुनने के लिए
मैं कहना चाहता हूँ कि मैं तुम्हें बहुत याद करता हूँ...कि जब तुम हवा में अपना दुपट्टा उड़ाया करती थीं...तो तुम बहुत अच्छी लगती थीं...कहना चाहता हूँ कि जब तुम खिलखिला के हँसती थीं तो तुम्हारी हँसी मेरे दिल में असर करती थी...और हर बार मैं यही ख्वाहिश पैदा करता था कि तुम यूँ ही जिंदगी भर मेरे साथ खिलखिला कर हंसती रहो...कहना चाहता हूँ कि जब तुम बच्चों सी हरकतें करती थीं तो तुम पर बहुत प्यार आता था
कहना चाहता हूँ कि तुम्हारी आइसक्रीम खाने की जिद मुझे बहुत पसंद थी...कहना चाहता हूँ कि तुम्हारा चुपके से मेरे गाल पर किस करना बहुत अच्छा लगता था...कहना चाहता हूँ कि तुम मुझे बहुत याद आती हो...कहना चाहता हूँ कि तुम्हारी याद मुझे हँसा जाती है और फिर ना जाने क्यों रोने को मन करने लगता है...और ना जाने क्यों, ना चाहते हुए भी आँखों से आँसू छलक जाते हैं
ये जिंदगी बहुत खूबसूरत है...इसे ख़ुशी से जीना...चाहे मैं रहूँ या ना रहूँ...याद है तुमने ये बात जिस पहाडी के पत्थर पर बैठ मुझसे कही थी...उस पर ना जाने क्यों मैं दोबारा गया...वो मुझे वीरान सी जान पड़ी...बिल्कुल मेरी जिंदगी की तरह...बेरंग, बेजान, बेमतलब सी...और जब इस सोच से उबर कर खुद को देखा तो पाया कि मैं भीग चुका हूँ...उस बारिश में जो काफी देर से हो रही थी...कमाल है आज पहली बार ऐसा हुआ कि बारिश हुई और मुझे उसके बंद होने पर पता चला...याद है मुझे तुम्हें बारिश बहुत पसंद थी...है ना...क्या आज भी तुम्हें बारिश में भीगना पसंद है
किताबों के दरमियान रखे हुए उन सूखे गुलाबों की पंखुडियों को जब हाथ से स्पर्श करता हूँ...तो ये मुझे पुरानी यादों में लेकर चले जाते हैं...वो तुम्हारे नर्म हाथ और मखमली बाहें...जिनसे तुम मेरे सीने से लिपट जाया करती थीं...वो किताबें जो तुमने दी थीं वो उसमें लिखी हुई कहानी ना बोल कर हमारी अपनी कहानी कहने लग जाती हैं...कमबख्त ये भी नहीं समझती...कैसे समझेंगी तुम्हारे हाथों का स्पर्श जो है उस पर और जिसे तुमने चूम कर दिया था...हर वो किताब उतनी ही महफूज़ है मेरे पास ठीक तुम्हारी यादों की तरह...
ये जो आँखें हैं जिन्हें तुम अक्सर दो नैना कहा करती थीं...आज भी इक कहानी बसी हुई है इनमें...पता है किसकी और कौन सी कहानी...तेरे मेरे ख्वाबों की कहानी...तेरी मेरी ख्वाहिशों की कहानी...
हाँ जब तब इन दो नैनों में कभी बादल तो कभी पानी नज़र आ जाता है...और उसके साथ ही वो ख्वाहिशें और वो ख्वाब दोनों ही गीले हो जाते हैं
याद है तुम्हें जब तुमने एक बार कहा था कि कहीं ऐसा न हो कि एक दिन हमें एक दूसरे को देखने के लिए आँखें तरस जाएँगी...पता नहीं क्या सोचकर तुमने ये कहा था...शायद तुम्हें एहसास हो चला था कि ये जिंदगी हमारी झोली में क्या डालने वाली है...शायद ये एक एहसास ही तो था जो हमे जोड़े रहा...जब तुम कुछ पूँछा करती थीं...तो मैं खामोशी से मुस्कुरा दिया करता था...और आज देखो मेरे पास कहने को इतना कुछ है...पर वो मुस्कुराती हुई आँखें नहीं जो मेरी तरफ देखा करती थीं...कुछ भी बड़े प्यार से सुनने के लिए
मैं कहना चाहता हूँ कि मैं तुम्हें बहुत याद करता हूँ...कि जब तुम हवा में अपना दुपट्टा उड़ाया करती थीं...तो तुम बहुत अच्छी लगती थीं...कहना चाहता हूँ कि जब तुम खिलखिला के हँसती थीं तो तुम्हारी हँसी मेरे दिल में असर करती थी...और हर बार मैं यही ख्वाहिश पैदा करता था कि तुम यूँ ही जिंदगी भर मेरे साथ खिलखिला कर हंसती रहो...कहना चाहता हूँ कि जब तुम बच्चों सी हरकतें करती थीं तो तुम पर बहुत प्यार आता था
कहना चाहता हूँ कि तुम्हारी आइसक्रीम खाने की जिद मुझे बहुत पसंद थी...कहना चाहता हूँ कि तुम्हारा चुपके से मेरे गाल पर किस करना बहुत अच्छा लगता था...कहना चाहता हूँ कि तुम मुझे बहुत याद आती हो...कहना चाहता हूँ कि तुम्हारी याद मुझे हँसा जाती है और फिर ना जाने क्यों रोने को मन करने लगता है...और ना जाने क्यों, ना चाहते हुए भी आँखों से आँसू छलक जाते हैं
ये जिंदगी बहुत खूबसूरत है...इसे ख़ुशी से जीना...चाहे मैं रहूँ या ना रहूँ...याद है तुमने ये बात जिस पहाडी के पत्थर पर बैठ मुझसे कही थी...उस पर ना जाने क्यों मैं दोबारा गया...वो मुझे वीरान सी जान पड़ी...बिल्कुल मेरी जिंदगी की तरह...बेरंग, बेजान, बेमतलब सी...और जब इस सोच से उबर कर खुद को देखा तो पाया कि मैं भीग चुका हूँ...उस बारिश में जो काफी देर से हो रही थी...कमाल है आज पहली बार ऐसा हुआ कि बारिश हुई और मुझे उसके बंद होने पर पता चला...याद है मुझे तुम्हें बारिश बहुत पसंद थी...है ना...क्या आज भी तुम्हें बारिश में भीगना पसंद है
किताबों के दरमियान रखे हुए उन सूखे गुलाबों की पंखुडियों को जब हाथ से स्पर्श करता हूँ...तो ये मुझे पुरानी यादों में लेकर चले जाते हैं...वो तुम्हारे नर्म हाथ और मखमली बाहें...जिनसे तुम मेरे सीने से लिपट जाया करती थीं...वो किताबें जो तुमने दी थीं वो उसमें लिखी हुई कहानी ना बोल कर हमारी अपनी कहानी कहने लग जाती हैं...कमबख्त ये भी नहीं समझती...कैसे समझेंगी तुम्हारे हाथों का स्पर्श जो है उस पर और जिसे तुमने चूम कर दिया था...हर वो किताब उतनी ही महफूज़ है मेरे पास ठीक तुम्हारी यादों की तरह...
ये जो आँखें हैं जिन्हें तुम अक्सर दो नैना कहा करती थीं...आज भी इक कहानी बसी हुई है इनमें...पता है किसकी और कौन सी कहानी...तेरे मेरे ख्वाबों की कहानी...तेरी मेरी ख्वाहिशों की कहानी...
हाँ जब तब इन दो नैनों में कभी बादल तो कभी पानी नज़र आ जाता है...और उसके साथ ही वो ख्वाहिशें और वो ख्वाब दोनों ही गीले हो जाते हैं
Thursday, September 1, 2011
रूठ ना जाना तुमसे कहूँ तो
मेरी जिंदगी,
आज जब शाम हो चली है...बादलों ने अपना रुख मोड़ लिया है...चारों ओर काली घटाएं छा गयी हैं...और इस वीराने में तुम्हारी याद ने दस्तक दे दी है....हाँ एक यही तो है जो हरदम मेरे साथ रहती हैं...तुम्हारी यादें...तुम्हारी बातें...जो हँसाती भी है और आँखों में आंसू भी दे जाती हैं...तुम्हारा मुझसे रूठ कर चले जाना ठीक साँसों के बिना जी ना पाने जैसा है....जब तुम इतने दिनों बाद मुझसे रूठ कर गयी तो हर पल ही ये एहसास होता है कि तुम्हारे बिना जीना मुमकिन ही नहीं...
इस घर में कुछ भी ऐसा नहीं जिससे तुम्हारी याद ना जुडी हो...वो बाहर का लॉन, वो कॉफी का कप, वो सोफा, वो बिस्तर, रसोई...हर जगह, हर चीज़ पर तुम्हारा जैसे स्पर्श है...जो हर घडी तुम्हारी याद दिलाता है...तुम्हारी अलमारी, तुम्हारी चूड़ियाँ , ठीक वैसे की वैसी ही हैं...मैंने उन्हें वैसा ही रख छोडा है...उनसे ढेर सारी यादें जो जुडी हैं...वो तुम्हारा मेरे सीने पर सिर रखकर ढेर सारी बातें करना...अपने अरमानों, अपने सपनो की बातें करना...मेरा तुम्हारे बालों को सहलाना...सब कुछ याद आता है...कहने को तो अभी चन्द रोज़ हुए हैं लेकिन ये एक युग बीतने जैसा है
जब रसोई में तुम मेरे लिए पूरे मन से कुछ पकाया करती थी और फिर पीछे से जाकर जब मैं तुम्हें अपनी बाहों में भर लेता और तुम्हारा कहना कि देखो वो जल जायेगा....मैं तुम्हें आटा लगा दूँगी....वो लिए हुए ढेर सारे चुम्बन....वो तुम्हारा कोमल स्पर्श....तुम्हारे चले जाने पर सब रह रहकर याद आते हैं
बाहरी लॉन में बैठ तुम्हारे साथ कॉफी के घूट के साथ की वो ढेर सारी गपशप...वो साथ मैं लुडो खेलना और मुझे हरा के तुम्हरा खुश होना , वो तुम्हारा मुस्कुराना...बरसती हुई बूंदों तले तुम्हारा भीगना...मुझे अपने पास खींच लेना...दूर के सुहाने नजारों को दिखाना...सब जैसे मेरे ख्यालों में, यादों में बस गया है...और एक तुम हो जो दूर जाकर बैठी हो....हाँ गलती तो मेरी ही है.....जो तुम्हें जाने दिया ...
तुम गयी हो तब से एक पल के लिए भी मुझे राहत नहीं...न कॉफी के घूट हैं...न कोमल स्पर्श...ना वो ढेर सारी बातें...ना गपशप...ना वो अब नजारे अच्छे लगते.....
तुम हो कि बस चली गयी रूठकर मुझसे...जानती हो कि मुझे ठीक से मनाना भी नहीं आता...आज जब तुम मेरे पास नहीं हो तो लगता है कि कहीं ये साँसे भी साथ ना छोड़ जाएँ...बस एक ही बात जानी और समझी है कि तुम नहीं तो कुछ भी नहीं....तुम्हारे बिना जीना मुमकिन नहीं...
हाँ अब इस अधूरेपन के साथ जीना मुमकिन नहीं...इस एहसास के साथ कि तुम अपने इस चाहने वाले नादान, नासमझ, बुद्धू को माफ़ करोगी और जल्द से जल्द वापस आकर तुम्हारे अपने सब कुछ को संभालोगी...इस वीराने को ख़त्म करोगी और मुझे एक और मौका दोगी...ताकि मैं तुम्हें जता सकूं कि इस दिल में तुम्हारे लिए कितना प्यार है...मेरी जिंदगी में तुम क्या हो....मेरे लिए तुम क्या हो...मैं बाहर देख रहा हूँ बारिश की बूंदे अपने बाहरी लॉन की दीवार को भिगो रही हैं...और मेरे आँसुओं की बारिश इस ख़त को....
"तुम्हारा अपना...तुम बिन अधूरा"
आज जब शाम हो चली है...बादलों ने अपना रुख मोड़ लिया है...चारों ओर काली घटाएं छा गयी हैं...और इस वीराने में तुम्हारी याद ने दस्तक दे दी है....हाँ एक यही तो है जो हरदम मेरे साथ रहती हैं...तुम्हारी यादें...तुम्हारी बातें...जो हँसाती भी है और आँखों में आंसू भी दे जाती हैं...तुम्हारा मुझसे रूठ कर चले जाना ठीक साँसों के बिना जी ना पाने जैसा है....जब तुम इतने दिनों बाद मुझसे रूठ कर गयी तो हर पल ही ये एहसास होता है कि तुम्हारे बिना जीना मुमकिन ही नहीं...
इस घर में कुछ भी ऐसा नहीं जिससे तुम्हारी याद ना जुडी हो...वो बाहर का लॉन, वो कॉफी का कप, वो सोफा, वो बिस्तर, रसोई...हर जगह, हर चीज़ पर तुम्हारा जैसे स्पर्श है...जो हर घडी तुम्हारी याद दिलाता है...तुम्हारी अलमारी, तुम्हारी चूड़ियाँ , ठीक वैसे की वैसी ही हैं...मैंने उन्हें वैसा ही रख छोडा है...उनसे ढेर सारी यादें जो जुडी हैं...वो तुम्हारा मेरे सीने पर सिर रखकर ढेर सारी बातें करना...अपने अरमानों, अपने सपनो की बातें करना...मेरा तुम्हारे बालों को सहलाना...सब कुछ याद आता है...कहने को तो अभी चन्द रोज़ हुए हैं लेकिन ये एक युग बीतने जैसा है
जब रसोई में तुम मेरे लिए पूरे मन से कुछ पकाया करती थी और फिर पीछे से जाकर जब मैं तुम्हें अपनी बाहों में भर लेता और तुम्हारा कहना कि देखो वो जल जायेगा....मैं तुम्हें आटा लगा दूँगी....वो लिए हुए ढेर सारे चुम्बन....वो तुम्हारा कोमल स्पर्श....तुम्हारे चले जाने पर सब रह रहकर याद आते हैं
बाहरी लॉन में बैठ तुम्हारे साथ कॉफी के घूट के साथ की वो ढेर सारी गपशप...वो साथ मैं लुडो खेलना और मुझे हरा के तुम्हरा खुश होना , वो तुम्हारा मुस्कुराना...बरसती हुई बूंदों तले तुम्हारा भीगना...मुझे अपने पास खींच लेना...दूर के सुहाने नजारों को दिखाना...सब जैसे मेरे ख्यालों में, यादों में बस गया है...और एक तुम हो जो दूर जाकर बैठी हो....हाँ गलती तो मेरी ही है.....जो तुम्हें जाने दिया ...
तुम गयी हो तब से एक पल के लिए भी मुझे राहत नहीं...न कॉफी के घूट हैं...न कोमल स्पर्श...ना वो ढेर सारी बातें...ना गपशप...ना वो अब नजारे अच्छे लगते.....
तुम हो कि बस चली गयी रूठकर मुझसे...जानती हो कि मुझे ठीक से मनाना भी नहीं आता...आज जब तुम मेरे पास नहीं हो तो लगता है कि कहीं ये साँसे भी साथ ना छोड़ जाएँ...बस एक ही बात जानी और समझी है कि तुम नहीं तो कुछ भी नहीं....तुम्हारे बिना जीना मुमकिन नहीं...
हाँ अब इस अधूरेपन के साथ जीना मुमकिन नहीं...इस एहसास के साथ कि तुम अपने इस चाहने वाले नादान, नासमझ, बुद्धू को माफ़ करोगी और जल्द से जल्द वापस आकर तुम्हारे अपने सब कुछ को संभालोगी...इस वीराने को ख़त्म करोगी और मुझे एक और मौका दोगी...ताकि मैं तुम्हें जता सकूं कि इस दिल में तुम्हारे लिए कितना प्यार है...मेरी जिंदगी में तुम क्या हो....मेरे लिए तुम क्या हो...मैं बाहर देख रहा हूँ बारिश की बूंदे अपने बाहरी लॉन की दीवार को भिगो रही हैं...और मेरे आँसुओं की बारिश इस ख़त को....
"तुम्हारा अपना...तुम बिन अधूरा"
Thursday, August 25, 2011
तुम “ज़िंदगी” हो कोई “ख्वाब” नही.
उस ने कहा!
तुम मे पहले जैसी बात नही
~
मैने कहा!
ज़िंदगी मे तेरा साथ नही
...~
उसने कहा!
क्या अब भी किसी की आँखों मे डूब जाते हो?
~
मैने कहा!
अब किसी आँख मे वो बात नही..
~
उसने कहा!
क्यों इतना टूट कर चाहा था मुझे?
~
मैने कहा!
इंसान हूँ पत्थर ज़ात नही
~
उसने कहा!
क्या मैं बेवफा हों?
~
मैने कहा!
मुझे अब वफ़ा की तलाश नही!
~
उस ने कहा!
भूल जाना मुझको
~
मैने कहा!
तुम “ज़िंदगी” हो कोई “ख्वाब” नही श्वेता
Tuesday, August 16, 2011
प्यारी श्वेता,तुम्हे तो पता ही है कि पहले मैं रोजाना शिवजी के मंदिर जाया करता था क्योंकि मैं समझता था की वो मेरे साथ कभी कुछ ग़लत नही होने देंगे पर शायद मैं ग़लत था और तुम्हारे जाने के बाद मैने वहाँ जाना छोड़ दिया है
पर कुछ दिन पहले नागपंचमी की सुबह ४ बजे मेरी पीठ पर एक छोटा साँप का बच्चा चिपका हुआ था लेकिन वो बेचारा मर चुका था
पिछले कुछ दिनो से मुझे कुछ अजीब से सपने आ रहे थे साँप बिच्छू देख रहा हू हालाँकि वो मुझे कुछ नुकसान नही पहुँच रहे हैं मैं सपने मैं शिवलिंग देख रहा हूँ, बाबा अमरनाथ जी का शिवलिंग देख रहा हूँ
इसीलिए कल मैं राजेश्वर मंदिर फिर से गया और वही सब पुरानी बातें दुबारा से rewind हो आई जब हम लोग साथ मैं जाते थे पूजा करते थे नन्दीगद के कान मैं मन्नत माँगना साथ साथ आरती करना, जब हमारी शादी हुई थी तब पहले हमने यही आकर जिंदगी भर साथ साथ रहने के प्रार्थना की थी, जब अंश हुआ था तब सबसे पहले यही आकर भगवान को धन्यबाद दिया था पर वो सब बेकार ही गया क्योंकि तुम्हारे बिन सब खुशी बेकार है, सब पूजा बेकार है कही ना कही इस दिल मैं शिवजी के लिए शिकायत जिंदगी भर रहेगी
Monday, August 8, 2011
क्यों अकेला छोड़ दिया...? ?
क्यों रुलाते हो मुझे ?
क्यों भूल जाते हो मुझे?
क्यों भूल जाते हो मुझे?
तेरे ही सहारे तो जी रहे हैं हम..
तो फिर क्यों अकेला छोड़ जाते हो ?
हर बात को छुपाना आता है तुमको,
तो फिर क्यों अकेला छोड़ जाते हो ?
हर बात को छुपाना आता है तुमको,
रूठों को मनाना आता है मुझे
रूठे हो तुम ना जाने किस बात पर मुझ से…
तो फिर वो बात क्यों नही बताते हो तुम मुझे?
जान जाती है मेरी
जब याद आती है तुम्हारी
तुम तो मुझे भुला देते हो
तो फिर क्यों याद आते हो मुझे?
हम जीने के बहाने मरते रहेंगे
प्यार हम तुमसे करते रहेंगे
प्यार तो तुम भी करते हो ना
तो फिर क्यों यू सताते हो मुझे?
या कह दो जहर पीने को
या कहो फिर मुझे जीने को
अगर मेरे साथ मैं नही चलना था तुमको
तो फिर क्यों मुझे रास्ता ज़िंदगी का दिखाया ?
बीच रास्ते मैं क्यू इस तरह अकेला छोड़ दिया?
कहो … कुछ तो कहो
क्यों अकेला छोड़ दिया...? ?
जब याद आती है तुम्हारी
तुम तो मुझे भुला देते हो
तो फिर क्यों याद आते हो मुझे?
हम जीने के बहाने मरते रहेंगे
प्यार हम तुमसे करते रहेंगे
प्यार तो तुम भी करते हो ना
तो फिर क्यों यू सताते हो मुझे?
या कह दो जहर पीने को
या कहो फिर मुझे जीने को
अगर मेरे साथ मैं नही चलना था तुमको
तो फिर क्यों मुझे रास्ता ज़िंदगी का दिखाया ?
बीच रास्ते मैं क्यू इस तरह अकेला छोड़ दिया?
कहो … कुछ तो कहो
क्यों अकेला छोड़ दिया...? ?
Saturday, July 30, 2011
अगर तुम मिल जाओ तो जमाना छोड देंगे हम
श्वेता वैसे तो बहुत से गाने हुमने साथ मैं सुने है पर आज भी कुछ गाने ऐसे है जिन्हे सुनकर मैं अपने आप को imotional होने से रोक नही सकता, क्योंकि इन गानो से हमारी कुछ खूबसूरत यादें जुड़ी हुई है,
जब भी इन गानो के बोल मेरे कानो मैं पड़ते है तो मेरे सामने वही नज़ारा आ जाता है जो हमने इन गानो को सुनते वक्त साथ मैं गुजारा था, ओर मैं अपने आँसुओं को छुपाने की कोशिश करता रहता हूँ
१. अगर तुम मिल जाओ तो जमाना छोड देंगे हम
२. पी लूँ तेरे नीले नीले नैनों से शबनम, पी लूँ तेरे गीले गीले होंठो की
सरगम
३. ताकते रहते तुझको सांझ सबेरे, नैनो मैं बस्या जैसे नैन ये तेरे
४. तुझ मैं रब बस्ता है यारा मैं क्या करूँ
५. वादा रहा प्यार से प्यार का होंगे अब ना जुदा ये मेरी धड़कने कह
रही है सदा
Tuesday, July 26, 2011
ज़िंदगी किस तरह बिताओगे,
पास जब अपने हमें ना पाओगे,
दिन में तनहाईयाँ सताएँगी,
दिन में तनहाईयाँ सताएँगी,
रात को चौंक कर जब उठ जाओगे,
रात भर नींद क्यूँ नही आती,
रात भर नींद क्यूँ नही आती,
तुम यह खुद भी समझ ना पाओगे,
लोग पूछेंगे इस तन्हाई का सबब, क्या छुपाओगे क्या बताओगे
पलकें हर बार भीग जाएँगी,
लोग पूछेंगे इस तन्हाई का सबब, क्या छुपाओगे क्या बताओगे
पलकें हर बार भीग जाएँगी,
जब कभी खुल के मुस्कराओगे
मेरी यादें बहुत सताएँगी,
मेरी यादें बहुत सताएँगी,
जब भी बारिश में भीग जाओगे,
खुद को तन्हा ना पा सकोगे कभी, हर जगह मेरा अक्स पाओगे
खुद को तन्हा ना पा सकोगे कभी, हर जगह मेरा अक्स पाओगे
This is true shweta, I love you forever till my last breath
Monday, June 20, 2011
कुछ ना बचा आख़िरी मुलाकात के बाद 27.09.2010, 07:30AM , AGRA
नींद नही आती अब उस रात के बाद
कुछ ना बचा आख़िरी मुलाकात के बाद
कुछ यादें कुछ वक़्त उसके साथ रह गया
मिट गयी लकीरे खाली ये हाथ रह गया
कहा नही कुछ उसकी बात के बाद
कुछ ना बचा आख़िरी मुलाकात के बाद
ज़िंदगी हर पल एक सज़ा हो गई
यादें उसकी जीने की वजह हो गई
रूठ गया सावन भी उस बरसात के बाद
कुछ ना बचा आख़िरी मुलाकात के बाद
तेरी यादों के चिरागो को जलाया हर शाम
तेरी बातो को बैठकर दोहराया हर शाम
दिल से ना थमा किसी का हाथ तेरे हाथ के बाद
कुछ ना बचा आख़िरी मुलाकात के बाद
कुछ ना बचा आख़िरी मुलाकात के बाद
कुछ यादें कुछ वक़्त उसके साथ रह गया
मिट गयी लकीरे खाली ये हाथ रह गया
कहा नही कुछ उसकी बात के बाद
कुछ ना बचा आख़िरी मुलाकात के बाद
ज़िंदगी हर पल एक सज़ा हो गई
यादें उसकी जीने की वजह हो गई
रूठ गया सावन भी उस बरसात के बाद
कुछ ना बचा आख़िरी मुलाकात के बाद
तेरी यादों के चिरागो को जलाया हर शाम
तेरी बातो को बैठकर दोहराया हर शाम
दिल से ना थमा किसी का हाथ तेरे हाथ के बाद
कुछ ना बचा आख़िरी मुलाकात के बाद
Tuesday, June 14, 2011
Teri Yaadon Ke Bina
Teri Yaadon Ke Bina Koi Lamha Guzaara Nahin
Ik Pal Nahin Jab Tumhe Humne Pukaara Nahin
Meri Naakaamiyon Ka Itna Bhi Gam Na Kijiye
Agar Aap Jeete Hain To Main Haara Nahin
Ye Naqsh-E-Dard Kaise Utar Jaaye Chehre Se
Maine Abhi Aapka Gam Dil Se Utaara Nahin
Tere Bin Youn Kat Rahi Dariya-E-Zindagi Mein
Kashti Bhi Hai Maajhi Bhi Hai,Kinaara Nahin
Kar Rakhaa Hai Jisne Saare Ghar Mein Ujaala
Aansu Hai Mera Ye Koi Toota Hua Taara Nahin
Kisko Gale Lagaa Ke Rooyen Na-Muraad Hum
Is Bhari Duniya Mein Apna Koi Sahaara Nahin
Mareez-E-Ishq Hai Tamannai Khudkushi Ka Ab
Gehre Hain Dil Ke Zakhm,Aur Koi Chaara Nahin
Wo Aa Ke Poonchh Den Aansu Hamari Aankhon Se
Itna Bhi Hamare Haq Mein Naseeb Hamara Nahin
Itna Hai Bad-Naseeb Ae Hal-E-Jaha.N
Loota Hai Zindagi Ne Jise Maut Ne Maara Nahin
Love4u: Chahenga Hum Tuje Marte Dam Tak
Love4u: Chahenga Hum Tuje Marte Dam Tak: "Ek Shayari Ka Khwab Ho Tum, Ek Aashiq Ki Aashiki Ho Tum, Ishq Kiya Hai Karte Rahenge, Jindgi Bhar Ka Gum Hiu Jhelte Rahenge, Tum Na Mili..."
Wednesday, June 8, 2011
तुम हो यहीं महसूस करताहूँ मैं
तुम हो यहीं महसूस करताहूँ मैं, जीना पड़ रहा है तुम्हारे बिन .
शायद इसलिए हर पल किस्तो मे मर रहा हूँ मैं
सबके सामने हंसते हुए थक गया हूँ मैं
शायद इसलिए तन्हा होते ही आँखों मे नमी भर रहा हूँ मैं
काटे नही कटता ये वक़्त तेरे बगैर
शायद इसलिए जाल दोस्ती का अपने इर्द-गिर्द बुन रहा हूँ मैं
वक़्त क्या बदला हालात बदल जाते हैं
जो हैं साथ उनके ख़यालात बदल जाते हैं
झोखा हवा का जब भी छू कर जाता है लगता है की तुम हो
यही सोच कर रोज़ अपने आप को छल रहा हूँ मैं
.
ज़िंदगी ने दिया कभी कुछ भी नही बस ले लिया थोड़ा बहुत जो था
रोज़ बस उन गुलाबो को काँटों मे से चुन रहा हूँ मैं
Tuesday, May 31, 2011
मुझे तो अब तक यक़ीन ना ...हुआ उसके चले जाने का...
असमा के तारे अक्सर पूछते है हमसे
क्या तुम्हे आज भी इंतज़ार है उसके
लौट आने का.
और ये दिल मुस्कुरा के कहता है
मुझे तो अब तक यक़ीन ना
...हुआ उसके चले जाने का...
°º¤ø,¸¸,ø¤º°`°º¤ø °º¤ø,¸¸,ø¤º°`
किसी को अपना बनाने मैं देर लग जाती है
एक वायदा निभाने मैं देर लग जाती है
प्यार तो पल भर मैं हो जाता है
पर उसे भुलाने मैं सारी उम् लग जाती है
एक वायदा निभाने मैं देर लग जाती है
प्यार तो पल भर मैं हो जाता है
पर उसे भुलाने मैं सारी उम् लग जाती है
Subscribe to:
Posts (Atom)



















